Tuesday, May 21, 2019

फांसी देने के पहले जल्लाद कैदी के कान में क्या कहता है

दिल्ली : फांसी की सजा के बारे में तो आपने सुना ही होगा। फांसी की सजा व्यक्ति को तब दी जाती है जब उसने कोई गंभीर अपराध किया होता है। कानून की नजर में जब कोई अपराध सबसे गंभीर अपराध होता है तब कानून उस अपराधी को मृत्युदंड दिया जाता है ।

सबसे बड़ी सजा फांसी को माना जाता है जो बहुत बड़े जघन्य या अक्षम्य अपराध के लिए दिया जाता है |
अपराधी को फांसी पर जल्लाद लटकाता है |
क्या आप जानते हैं फांसी देने के पहले जल्लाद कैदी के कान में क्या कहता है ?
आपको बता दें मौत की सजा प्राप्त अपराधी अपनी सजा को माफ नहीं करवा सकता और वह भाग भी नहीं सकता। ऐसे में आपके दिमाग में ये सवाल उठता है की वो अपनी अंतिम इच्छा में क्या मांग कर सकता है। आईए आपको बताते है की मौत की सजा प्राप्त अपराधी क्या इच्छाएं मांग सकता है। कैदी के पास यह अधिकार होता है, कि वह अपनी अंतिम इच्छा में अपना कोई मनपसंद खाना या कोई स्पेशल भोजन जेल प्रशासन से मांग सकता है। इस इच्छा को खुशी-खुशी पूरी किया जाता है।
फांसी की सजा पाने वाले व्यक्ति को यह अधिकार भी होता है, कि वह अंतिम इच्छा के रूप में अपने परिवार वालों से मिलने की इच्छा कर सकता है। जेल प्रशासन उसे पूरे परिवार से मिलवाता है, अगर उसकी यह इच्छा है। फांसी की सजा प्राप्त कर चुका व्यक्ति अपने अंतिम समय में अपने धर्म की कोई पवित्र पुस्तक पढ़ने की इच्छा कर सकता है, उस की आखिरी इच्छा के रूप में उसे धर्म की पुस्तक दी जाती है। फांसी के बाद अपराधी के शव की डॉक्टरों द्वारा पुष्टि की जाती है। फिर उसके परिवारवालों को सौंप दिया जाता है। इसमें काफी समय लगता है।
सामाज में फांसी का गलत असर ना हो इस वजह से भी सूर्योदय से पहले फांसी दी जाती है। यह भी माना जाता है कि सुबह के समय व्यक्ति मानसिक तौर पर काफी हद तक तनावमुक्त होता है। देश में जो मिडिया और आम लोग होते हैं वह भी इतने सक्रिय नहीं होते हैं इसी वजह से सूर्योदय से पहले फांसी दी जाती है।
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